जोशीमठ के निवासियों ने दरारें दिखने के बाद घरों को किया खाली, ठंड के बीच घरों के बाहर गुजारी रात

उत्तराखंड के जोशीमठ के निवासियों ने कहा कि शहर की बुनियाद डूब रही है लेकिन सरकार सामूहिक पुनर्वास की उनकी गुहार पर कुछ नहीं कर रही। स्थानीय लोगों ने दरारें दिखने के बाद अपने घरों को खाली कर दिया। वहीं ठंड के बीच लोग घरों के बाहर रात गुजार रहे हैं।
‘जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति’ के संयोजक अतुल सती ने यहां पत्रकारों से कहा, “हम एक साल से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमारी बात नहीं सुनी जा रही।” उन्होंने कहा, “जोशीमठ का आधार डूब रहा है। 500 से अधिक घरों में दरारें आ गई हैं। लोग अपने घरों को बांस के खंभे से सहारा देकर संभालने की कोशिश कर रहे हैं और चीथड़ों से ढंक रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार पर कोई असर नहीं पड़ रहा।” उन्होंने कहा कि जोशीमठ रणनीतिक, धार्मिक और पर्यटन महत्व का अंतिम सीमावर्ती शहर है जो भूकंपीय क्षेत्र पांच में आता है।
वहीं अतुल सती ने चेतावनी दी कि यदि भूकंप आया, तो जान-माल को भारी नुकसान होगा। विशेषज्ञों की एक टीम ने भी कस्बे का सर्वेक्षण किया और पाया है कि यह धीरे-धीरे डूब रहा है। बड़ी संख्या में घरों में बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले पर चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना से रिपोर्ट मांगी है और रिपोर्ट आने पर सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है।

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